Tuesday, 19 July 2016

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत!

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत!!
आप सब कैसे हैं? दोस्तों, पिछले सप्ताह, मैंने आई आई टी कानपुर में ह्यूमन वैलउज एंड प्रोफेशनल एथिक्स पर एक वर्कशॉप की जिसमे बहुत ही ज़बरदस्त एक्सपीरियंस रहा मेरा. उस वर्कशॉप में मुझे बताया गया की बॉडी और सेल्फ एक नहीं बल्कि अलग अलग हैं. हममे से ज़्यादातर लोग सोचते हैं की उन्हें अपनी बॉडी का ध्यान रखना चाहिए और इसके लिए न मालूम हम क्या क्या पापड़ बेलते हैं जैसे कि  रोज़ जिम जाना, एक्सरसाइज करना, कॉस्मेटिक्स  यूज़ करना, डाइट पर रहना आदि. अब क्वेश्चन ये ही की क्या सिर्फ बॉडी ठीक रहने से ही हम खुश रहेंगे? नहीं ऐसा नहीं है, कई बार कुछ कमी सी लगती है. इसलिए दोस्तों, बहुत ज़रूरी है कि  हम अपने सेल्फ यानि मन पर भी ध्यान दें. मगर कैसे? आसान नहीं है ये लेकिन अगर हम लगातार प्रैक्टिस करते रहेंगे तो ये असम्भव भी नहीं है. और ये एक्सरसाइज है, अपने ध्यान को पकड़ने की क्रिया. कई बार हम काम तो कुछ और करते रहते हैं लेकिन हमारा मन यानि सेल्फ कुछ और ही सोचता रहता है. ये विचार दो प्रकार के होते हैं: एक पॉजिटिव और दूसरा नेगेटिव. अगर हम पॉजिटिव विचारों का मंथन कर रहे हैं इसका मतलब हमारा सेल्फ हैप्पी है और हमें अच्छी फीलिंग आती है परन्तु अगर हमारा सेल्फ यानि मन कुछ नेगेटिव सोच रहा है तो हमें इसका असर हमारी बॉडी पर देखने की कोशिश करनी चाहिए. क्योंकि जब हम नेगेटिव यानि नकारात्मक विचारों से घिरे रहते हैं तो हमारी हार्ट बीट्स बढ जाती हैं, हमारा ब्लड प्रेशर यानि रक्त चाप बढ जाता है और इस तरह हम बहुत परेशांन हो जाते हैं.
दोस्तों, कहते हैं कि मन यानि हमारे विचारों की गति बहुत तीव्र होती है और मन २४ घंटे कुछ न कुछ सोचता रहता है तो यदि विचारों को पकड़ने की एक्सरसाइज हम निरन्तर करते रहें तो हम अपनी बॉडी के साथ साथ अपने सेल्फ को भी स्वस्थ रख सकते हैं और सेल्फ कॉन्फिडेंस यानि आत्म-विश्वास को भी बढ़ा सकते हैं. थोड़ा डिफिकल्ट है पर इम्पॉसिबल नहीं। तो आप सब ज़रा देखिये की आप पूरे टाइम क्या सोचते रहते हैं...आपके विचारों से आप ख़ुशी का भाव फील  करते हैं या आप परेशानी का भाव फील कर रहे हैं. कभी कभी हम छोटी-छोटी बातों के कारण बहुत परेशान रहते हैं जैसे काम वाली ने बिना बताये छुट्टी ले ली या रास्ते में गाड़ी चलते समय आपकी गलती न होते हुए भी लोगों ने आपको गलत ठहराया वगैरह वगैरह और इन सब घटनाओं की वजह से बाद में  हम कितनी देर तक परेशान रहे, ये देखने वाली बात है.
मेरे ख्याल से आपको समझ में आ रहा होगा की मैं क्या कहना चाहती हूँ. अपने सेल्फ यानि मन को स्वस्थ रखने के लिए ज़रूरी है की आप इसकी बागडोर किसी काम वाली, सब्जी वाली या राहगीर को न दें. खुश रहें तभी आप पॉजिटिवली अपनी लाइफ जी पाएंगे.
मुझे ज़रूर बताइयेगा की आप को मेरा ब्लॉग कैसा लगा.
खुश रहें, अपना ध्यान रखे और स्वस्थ रहें क्योंकि जीवन ईश्वर का सर्वोत्तम उपहार है.
ममता शर्मा
चित्र: गूगल.कॉम 

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